बाल कलाकार के रूप में फातिमा साना शैख़ ने अपने बचपन की बात साझा किया की 15 घंटा काम करना पड़ता था I

फातमा साना करियर की शुरुआत
फातिमा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बचपन में की थी। उन्होंने 1997 में फिल्म चाची 420 में बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया था। इसके बाद, 2001 में शाहरुख़ ख़ान के साथ फिल्म वन 2 का 4 में भी उन्होंने बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया। उन्होंने “हम साथ-साथ हैं” (2001) और “तारे जमीन पर” (2007) जैसी फिल्मों में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया। बाद में उन्होंने “दंगल” (2016) और “ठग्स ऑफ हिंदोस्तान” (2018) जैसी बड़ी फिल्मों में अभिनय किया।अब वह अपनी आगामी फिल्मों की तैयारी में हैं और साथ ही बाल कलाकारों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रही हैं।

खारी बातें सुननी पड़ती थीं
फातिमा ने बताया की एक बाल कलाकार के रूप मे कई बार एसी बाते सुनने को मिलता था जो की बाल कलाकार को नहीं सुनना चाहिए I मै उस समय उन बातो को समझ नहीं पाती थी मुझे अगर उस समय इन सभी बातो का समझ होता तो मुझे लगता है की फ़िल्मी इण्डस्ट्री में बाल सुरक्षा अधिकारी (child welfare officer) होना चाहिए ताकि बच्चों को किसी भी तरह की असहज स्थिति का सामना न करना पड़े।
बाल कलाकारों के अधिकारों की जरूरत क्या होनी चाहिए

- फातिमा शैख़ ने कहा की फ़िल्मी इंडस्ट्री में एक बदलाव बहुत जरुरी है।
- ताकि बाल कलाकारों को किसी भी मुसीबत का सामना नहीं करना पड़े।
- बच्चो को ज्यादा समय तक काम नहीं करवानी चाहिए।
- बच्चो के शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी ध्यान रखना चाहिए।
- सेट पर बाल मनोवैज्ञानिक और सुरक्षा का अधिकारी होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि हॉलीवुड और अन्य अंतरराष्ट्रीय फिल्म इंडस्ट्रीज में बाल कलाकारों के लिए सख्त नियम हैं,
लेकिन भारत में अभी भी इस दिशा में काम करने की जरूरत है। ताकि भारत में भी अगर शक्त नियम होते तो जाए दिन हुए घटनाओ पर रोक लगाया जा सकता है ।
फातिमा सना शेख ने अपने अनुभव साझा करके बाल कलाकारों की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उनकी बातें इस ओर इशारा करती हैं कि इंडस्ट्री को बच्चों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ माहौल बनाने की जरूरत है। उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और भविष्य में बाल कलाकारों के लिए बेहतर नियम बनाए जाएंगे। और सरकार उचित कदम उठाते हुए सशक्त नियम बनाये एसा उनका सोचना है